Saturday, April 6, 2019

चुनावी रण में मिठास पैदा करने वाली जमीन की कड़वी हकीकत



रवीन्द्र कुमार 

उत्तर प्रदेश की 40 लोकसभा क्षेत्रों में देश की आधी मिठास पैदा होती है। इनमें से आठ लोकसभा सीटों पर पहले फेज के चुनाव भी है। गन्ना किसान धरना प्रदर्शन करने पर आमादा हैं और इस फेज में चुनावों का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं। इसका कारण ये है कि गन्ना किसान पिछली सरकारों से तो परेशान थे ही नयी सरकार से भी बहुत ज्यादा खुश नहीं है। क्योंकि चीनी मिलों पर उनका करीब 12000 करोड़ बकाया है जबकि सरकार ने 14 दिन में पूरे पेमेंट का वादा किया था। 




चुनावी वादा और गन्ना किसानों की अनसुलझी पहेली
चुनाव हैं तो संभव है वादे भी होंगे और मनलुभावन बाते भी होंगी। मेरठ में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें गन्ना किसानों के बकाये की जानकारी है। वो ताबड़तोड़ यहां वादा भी करते गए कि 6 तारीख तक गन्ना किसानों को उनका पैसा मिल जाएगा। लेकिन, 6 तारीख बीत चुकी है और कुछ को छोड़कर गन्ना किसान बैंक में पैसे आने या फिर मिलने का इंतजार ही कर रहे हैं।

15 लोकसभा क्षेत्र और मिठास में घुलता जहर
पश्चिमी यूपी के 15 लोकसभा क्षेत्र गन्ना बेल्ट में हैं। वहीं, यूपी में 40 लोकसभा क्षेत्रों में गन्ने की खेती होती है। सबसे ज़्यादा गन्ना उत्पादन वाले प्रदेश के इस हिस्से को गन्ना बेल्ट कहते हैं. इनमें सहारनपुरकैरानामुजफ्फरनगरशामलीबिजनौरनगीनाबागपतमेरठगाजियाबादअमरोहामुरादाबादपीलीभीतखीरीशाहजहांपुर और सीतापुर शामिल हैं। इन क्षेत्रों के 50 लाख परिवार और दो करोड़ वोटर गन्ने से मिलने वाली रकम पर ही आश्रित हैं। चीनी मिल भुगतान करती हैं तो किसान अपना घर का काम और शादी व्याह से लेकर कर्जदारी तक चुकाता है। लेकिन, जो चीनी देश के लोगों के मुंह में मिठास घोलती है। वह किसानों के लिए कड़बे जहर जैसी बनी हुई है।




मेरठ, बागपत और मुजफ्फर नगर के किसान हैं नाराज
मेरठ के किसान धीरेन्द्र का कहना है कि उनका बकाया पिछले दिसंबर का है। लेकिन, चीनी मिल देने का नाम नहीं ले रही हैं। और वहीं, हमारी मुलाकात मेरठ के ही ओर दूसरे किसानों से भी हुई हमने उनसे पूछा कि उनका पैसा अभी तक मिला या नहीं। क्योंकि सरकार ने 6 अप्रैल तक की समय दिया था। किसानों ने बताया कि हम भी इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, अभी तक तो पैसा आया नहीं। वहीं, हमने ये भी पूछा कि उनका कितना पैसा बकाया है तो किसानों ने बताया कि उनका तीन लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक का भुगतान शेष है। जिसके चलते उनके कई जरूरी काम अभी तक रुके हुए हैं। जिसमें शादी व्याह से लेकर बच्चों की फीस और देनदारी तक बकाया है। 
किसान इतने नाराज दिखे कि उन्होंने यहां तक कहा कि अगर समय से पैसा नहीं आया तो वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों का बहिष्कार करेंगे। और वोट नहीं डालेंगे।


गन्ना किसानों पर यूपी में होती राजनीति
आरएलडी अध्यक्ष अजीत सिंह चुनावी रैली करने जब बागपत पहुंचे तो सबसे पहले गन्ना किसानों को ही साधा। अजीत सिंह ने कहा कि योगी जी कहते थे कि 14 दिन में ही गन्ना किसानों का भुगतान हो जाएगा। लेकिन, हाल ये है कि चुनाव सिर पर है और किसान गन्ना भुगतान का इंतजार कर रहा है।


वहीं, यूपी सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ अपनी हर रैली में गन्ना किसानों के भुगतान की बात करते हैं। लेकिन, चीनी मिल्स पर सख्ती बरतने का दावा करने वाले योगी हकीकत में चीनी मिल्स और भुगतान करने में लगभग वहीं रवैया अपनाए हुए हैं जो पुरानी सरकारों ने अपनाया था। फर्क इतना है कि पुरानी सरकारों में भुगतान के बाद ढिढोरा नहीं पीटा गया और मौजूदा सीएम आधा भी भुगतान करें तो वो चुनावी रैली का हिस्सा तो बनता ही है पोस्टर बैनर में भी छपा दिखता है।
वहीं, पिछले दो साल से एक ही रोना सूबे के सीएम और देश के पीएम अक्सर करते नजर आते हैं। वो आरोप लगाते हैं कि पिछली सपा की सरकार ने गन्ना किसानों की 35000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बक़ाया हमारी सरकार के लिए छोड़ दिया।





अब इस चुनावी माहौल के बीच आपको लखीमपुर खीरी लिए चलते हैं। ये वो इलाका है जो देश का चीनी का कटोरा भी कहलाता है। और यहां से खीरी में सपा-बसपा गठबंधन की उम्मीदवार हैं पूर्वी वर्मा।

पूर्वी गन्ना किसानों के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर अपना और पार्टी का प्रचार कर रही हैं। गन्ना किसानों के बीच जाकर वोट मांग रही हैं। पूर्वी एमबीबीएस हैं और जेएनयू से पब्लिक हेल्थ में पीएचडी भी कर चुकी हैं। वे कहती हैं कि 19 मार्च 2017 तक योगी सरकार के आने से पहले 21577.48 करोड़ का गन्ना खरीदा गया और 15168.07 करोड़ का भुगतान हो गया. तो पीएम कैसे 35000 करोड़ का बकाया बता रहे हैं।

यानी किसानों को जो आंकड़ा दिया जा रहा है या तो वो गलत है या फिर सरकार झूठ बोल रही है। वहीं, पूर्वी वर्मा का आरोप है कि बीजेपी सरकार ने 14 दिन में भुगतान का वादा तोड़ा है।
प्रधानमंत्री तक गन्ना किसानों को सपना दिखा कर चले जाते हैं। लेकिन, सपा – बसपा पर आरोप लगाने वाली सरकार को हम बताना चाहेंगे कि अगर हमारी सत्ता में वापसी होत है तो हम 14 दिन में गन्ना किसानों को भुगतान करेंगे।

खैर ये तो रही चुनाव और चुनावी वादों की बात अब आपको एक नया फरमान जो यूपी सरकार ने दिया है उसकी जानकारी भी दिए देते हैं। यूपी सरकार ने पहले चरण से पहले ही गन्ना किसानों का आधा पैसा यानी करीब 5000 करोड़ रुपये देने का वायदा किया। जिसका इंतजार अभी तक किसान कर रहे हैं। यानी पहले तो तय भुगतान से आधा भुगतान और शर्त ये कि शेष जून तक यानी अगर सत्त में बीजेपी सरकार नहीं आयी तो मामला टाला भी जा सकता है। क्योंकि चुनाव के नतीजे तो 23 जून तक आ ही जाएंगे। और नयी सरकार का गठन हो जाएगा। वापस आए तो भुगतान नहीं तो ठिकरा नयी सरकार के सिर।


कोर्ट से आयी किसानों के लिए राहत की खबर
चुनावी रैलियों और प्रचार के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट से किसानों के लिए राहत की खबर आयी है। अब गन्ना किसानों को बकाये पर ब्याज भी मिल सकेगा। बकाये पर ब्याज दिए जाने के हाईकोर्ट के पिछले आदेश पर अमल किये जाने की जानकारी यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिए गए अपने हलफनामे में दी है। 



यूपी सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि जो चीनी मिलें फायदे में चल रही हैंवहां से किसानों को बकाये पर बारह फीसदी सालाना की दर से ब्याज दिलाया जाएगा जबकि घाटे पर चलने वाली मिलों से सात फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। यूपी सरकार ने अपने हलफनामे में वित्तीय वर्ष 2012 -13 से 2014- 15 तक तीन सालों के बकाये पर ब्याज का भुगतान कराए जाने की बात मंजूर कर ली है। बकाये पर ब्याज दिए जाने से तकरीबन चालीस लाख गन्ना किसानों को फायदा होने की उम्मीद है। अकेले तीन सालों के बकाये पर ही इन किसानों को दो हजार करोड़ रूपये से ज़्यादा का ब्याज मिल सकेगा। यूपी की पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार ने चीनी मिलों द्वारा किसानों को दिए जाने वाले ब्याज को माफ़ कर दिया था। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो साल पहले नौ मार्च  2017 को  आदेश जारी कर गन्ना किसानों के बकाये पर ब्याज समेत भुगतान करने का आदेश दिया था। यूपी की योगी सरकार ने भी किसानों के बजाय मिल संचालकों के हित के मद्देनजर अदालत के इस आदेश पर अमल नहीं किया। इस पर किसान नेता व राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना की अर्जी दाखिल की। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया तो यूपी सरकार ने आज हलफनामा दाखिल कर हाईकोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक़ गन्ना किसानों को उनके बकाये पर ब्याज समेत भुगतान कराए जाने की बात कही। अदालत में यूपी के केन कमिश्नर संजय भूस रेड्डी के हलफनामे में कहा गया कि किसानों को अब उनके बकाये पर सात और बारह फीसदी की दो दरों से भुगतान कराया जाएगा। अवमानना याचिका पर जस्टिस सुनीत कुमार की बेंच में सुनवाई हुई। अदालत के दखल पर हुए इस फैसले से गन्ना किसानों को दोहरा फायदा होगा। एक तो उन्हें पुराने बकाये पर ब्याज मिल सकेगा और साथ ब्याज से बचने के लिए मिल संचालक अब किसानों को जल्द से जल्द उनके बकाये का भुगतान करने की कोशिश करेंगे। अदालत में किसानों की तरफ से दलील दी गई कि जब उन्हें बीज -खाद व खेती के उपकरण खरीदने की खातिर बैंकों से लिए गए लोन पर ब्याज देना पड़ता है तो उन्हें अपने बकाये पर भी ब्याज पाने का पूरा हक़ है। यूपी में इस समय 121 चीनी मिलें काम कर रही हैं। जिसमें से 24 चीनी मिलें सहकारी क्षेत्रएक चीनी मिल निगम और 96 चीनी मिलें निजी क्षेत्र की हैं। 

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