Wednesday, January 19, 2011

मासूमों के नाम पर कमाई


दिल्ली सरकार ने सभी नीजि स्कूलों को ये आदेश दिए हैं कि वो अपने स्कूलों में 25 फीसद सीटों पर कमजोर वर्ग के बच्चों को दाखिला दें। लेकिन इस मामले में दिल्ली के सभी बड़े स्कूल नाक भौ सिकोड़ रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि इस तरह से उनके स्कूल का बजट खराब हो जायेगा जिसका भुगतान शेष 75 फीसद बच्चों को बढ़ी हुई फीस चुका कर पूरा करना होगा। यानी स्कूल अपने बजट से गरीब बच्चों को नहीं पढ़ायेगा। स्कूल अपनी कमाई को किसी हाल में कम नहीं होने देगा।

यानी नीजि स्कूल किसी भी हालत में देश गरीबों को शिक्षा नहीं देंगे। वहीं अगर स्कूलों के कारनामों और घोटालों पर नजर डाली जाये तो दिल्ली के अधिकतर नीजि स्कूलों ने सरकार से बाजार से आधी से कम कीमत पर स्कूल चलाने के लिए जमीन ली है... जमीन के अलावा स्कूल टैक्स में रियायत लेते हैं। गरीबों के नाम से हर साल नीजि स्कूल लाखों रुपये की डोनेशन और फंड खा जाते हैं अलग से।

मामला यहीं रुकता तो भी ठीक था....दिल्ली के कई नामी स्कूल हर साल गरीबों के नाम से स्पेशल क्लास देने के नाम से फंड खा रहे हैं....इसमें दिल्ली का डॉन बॉस्को स्कूल और कालका पब्लिक स्कूल जैसे नामी नाम हैं। ये दोनों स्कूल गरीब बच्चों को एक्सट्रा क्लास देते हैं और वोकेशनल कोर्सस के नाम से अलग से क्लास चलाते हैं...लेकिन ये क्लासेस महज कागजी कार्यवाही है। यहां डॉनबॉस्को में गरीबों के लिए क्लास के नाम पर खैरात बांटने का काम चलता है। शाम को स्कूल बंद होने के बाद पांच से सात बजे तक गरीब बच्चों को यहां पढ़ाया जाता है वो भी स्कूल में बने प्रगाढ़ के खुले हाल में...जहां से बच्चों को न तो स्कूल में जाने की इज्जात होती है औऱ न ही क्लास में दाखिल होने की...यहीं पर बिछे मैट पर ये बच्चे पढ़ते हैं... और स्कूल दिल्ली सरकार से गरीब बच्चों के लिए मोटा फंड लेता है...कागजों में दिखाया जाता है कि उसने इन बच्चों को साधारण स्कूल के बच्चों के साथ ही पढ़ाया है औऱ उन्ही के साथ शिक्षा दीक्षा दे रहा है। ठीक इसी तरह से कालका पब्लिक स्कूल का भी हाल है। ये स्कूल गरीब बच्चों के लिए क्लास चलाते हैं...लेकिन क्लास कहां औऱ किस समय चलती हैं...ये या तो स्कूल के मैनेंजमेंट को पता है या फिर दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को...इसके अलावा इन कक्षाओं के किसी को जानकारी नहीं है।

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