Saturday, December 18, 2010

‘सेवा एवं समर्पण के 125 वर्ष’


कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भले ही अपनी अध्यक्ष सोनिया गांधी के तारीफ में दिन रात कसीदे पढ़ते न थकते हों...और उनकी मौजूदगी को...पार्टी की परंपरा का मजबूत आधार मानते हों...लेकिन असल कहानी कुछ और ही है...आप ये बात सुनकर थोड़ा हैरान जरूर होंगे...लेकिन ये हकीकत है। हम आपको बताते हैं कि सोनिया की अध्यक्षता में कांग्रेस क्या वाकई परंपरा को निभा पा रही है। कांग्रेस में ये परंपरा रही है कि पार्टी के ब्लाक स्तर के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन दो साल में एक बार हो...लेकिन सोनिया गांधी ने जब से पार्टी की कमान संभाली...ये अधिवेशन तीन साल में एक बार होना तय हुआ...लेकिन पार्टी इस परंपरा को कायम नहीं रख पाई...और पहली बार ऐसा हो रहा है कि...कांग्रेस का महाअधिवेश जो दिल्ली में चल रहा है....पांच साल बाद आयोजित किया जा रहा है। यही नहीं, पहली बार ऐसा होगा जब कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित इस महाअधिवेश में पार्टी कार्यकर्ता ही अपनी ही पार्टी के बडे़ नेताओं से नहीं मिलेंगे। कांग्रेस महाधिवेशन की परंपरा रही है कि, पार्टी के बड़े नेता महाअधिवेश स्थल पर बडे़ मुद्दों की चर्चा पार्टी कार्यकर्ताओं से पहले सत्र में करें। लेकिन ये पहली बार होगा....जब बड़े नेता किसी भी कार्यकर्ता से बात नहीं करेंगे...यही नहीं सोनियां गांधी के अध्यक्ष रहते कांग्रेस की एक और परंपरा खत्म हो गई है...पीसीसी, एआईसीसी, और कांग्रेस की दूसरी बड़ी मिटिंग जो साल में तीन या चार बार हुआ करती थी...लगभग समाप्त हो चुकी हैं....हलांकि एक बार फिर कांग्रेस को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के लिए.....सोनिया गांधी महाअधिवेश में भ्रष्टाचार, महंगाई, और दूसरे बड़े मद्दों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुखातिब होंगी.....लेकिन ये बात गौर करने वाली होगी कि....क्या सोनियां गांधी असल में कांग्रेस और उसकी परंपराओं को मजबूती प्रदान कर पाएंगी...वो भी तब जब कि सरकार को कई मुद्दों पर कार्यकर्ताओं को जवाब देना है।

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