Saturday, July 24, 2010

फिर कोई महाभारत क्यों नहीं होता



फिर से कोई महाभारत क्यों नहीं होता
इस देश में फिर से कोई अर्जुन पैदा क्यों नहीं होता....
सुना था “जब जब पाप बढ़ेगा धरती पर लूंगा जन्म में”
चीर हरण द्रोपदी का हो रहा चौराहे पर
धर्म पड़ा है सड़कों पर
पिस रही है मानवता भूख की चक्की में
सुलग रही है आग दिल के जज्बातों में
फिर क्यों कोई कृष्ण पैदा नहीं होता
बूझती आंखों से पड़ा भीष्म
शरशैय्या पर
क्यों कोई धर्मराज
टूटती सांस को नहीं संभालता
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