Thursday, February 18, 2010

मेरी बात

मेरी बात
पागल की डायरी में अजब गजब किस्सें हैं। कुछ मीडिया जगत के तो कुछ यहां वहां के लेकिन है सभी सच्चे और आंखों से देखें। मेरा एक दोस्त है वह कहता है जब आदमी बहुत ज्यादा बात करने लगता है तो वह पागल होने से पहले की स्थिति होती है। यहां हम आपको बता देते हैं कि हम आलरेडी अपने आपको पागल मान चूके, क्योंकि अगर होश में रहे तो भी पागल ही कहलायेंगे। इससे बेहतर ये है कि अपने आपको पागल मान लिया जाये। मेरी कोशिश ये बिल्कुल भी नहीं रहेगी कि आप मेरी बातों से इत्तफाक रखे। क्योंकि ये मैं क्यों मानू कि जो मैं कह रहा हूं वह सभी पर लागू होता हो, लेकिन इतना तो मैं कह सकता हूं कि जो मैं कहूंगा उसमें एक आग जरूर होगी जो आपके दिलों में आग बेशक न लगा पाये लेकिन इतना जरूर करेगी कि आपको भीतर बैठे उस आदमी को जरूर झकझोर जायेगी जो मेरी तरह सोचता है और इस समाज, दुनिया को समझने की कोशिश करता है। मेरी बातें एक अहसास अवश्य पैदा करेंगी। कहते हैं न कहना जरूरी है, क्योंकि कहने से ही मसले हल होते हैं और कहने से ही आग भी लगती है। कहने से दिल का भड़ास निकलती है कहने से ही समाज में बदलाव आता है।
मेरा एक दोस्त है वह अक्सर कहता है सत्संग करने से इस जीवन को जीने की ललक पैदा होती है और अपने दिल की बात कहने से इस जीवन को समझने की ताकत मिलती है। जीवन जीना जितना जरूरी है उतना ही इसे समझना भी जरूरी है। जब जीवन का हर पहलू कहने और सुनने से जुडा हो तो ये भी जरूरी है कि हम खूब बोले, इतना कि मरने से पहले अंतिम सांसों में ये बात घुटी न रह जाये कि यार ये कहना अभी शेष रह गया। बल्कि अंतिम सांसों के दौरान तो होना ये चाहिए कि ये लगे कि बस यार अब बहुत बोल चूके अब थोडी शांति आवश्यक है और चिरनिद्रा में जाकर असिम शांति को प्राप्त हुआ जाये।
मेरे ब्लॉगर पर आपको पत्रकारिता से जुडे लोगों की खास खबर मिलेंगी। यहां य़शवंत भाई के ब्लॉगर भडास की तरह या उनके बेबपोर्टल की तरह आपको शायद मसाला न मिले लेकिन मीडिया की सच्ची और ईमानदारी से रखी बातों की जानकारी अवश्य मिलेगी। पागल की डायरी बेसिकली एक पत्रकार की डायरी है। इस डायरी में आपको पत्रकारिता के क्षेत्र में चल रहे अपडेट नौकरियां और पत्रकारिता के क्षेत्र में चल रहे अपडेट जरूर मिलेंगे। यहां पर उन लोगों का भी दिल से स्वागत किया जायेगा जो अपने विचार यहां रखना चाहते है।

धन्यवाद
आपका पागल


पत्रकारिता बनाम कमाई का जुगाड
पत्रकारिता को कुछ लोग समाज की सेवा करना और देश का चौथा स्तंभ भी मानते हैं। ये वह लोग है जिन्हें पत्रकारिता के बारे में जानकारी नहीं है। आज पत्रकारिता केवल कमाई का जरिया है और ऐसा जरिया है जिसमें न तो अक्ल की जरूरत है और न ही मेहनत की। आप अगर ऐन केन प्रकरण से पत्रकार बन गये तो साहब आपकी मौज ही मौज है। शराब और मूर्गें की टांग चूसने के लिए आपको कभी भी पैसा खर्च नहीं करना पडेगा बस आपको थोडा से बेशर्म होना है कुछ हमारे सीनियर पत्रकार लोगों की तरह जिन्हें आप पेज थ्री की पार्टी में आसानी से देख सकते हैं। ये लोग ऑफिस से सिर्फ बाहर तभी जाते हैं जब इन्हें ये पता होता है कि फलां जगह आज मुर्गा और शराब का जुगाड़ है। ये वह लोग भी है जो अब देश के तेज और बहुत तेज चैनलों में सीनियर पोस्ट पर बिराजमान हैं। ये वह लोग भी है जो पत्रकार कम और दलाल ज्यादा हैं। इनके अगर मैं नाम लेना आरंभ करूं तो नाम लिखते लिखते और इनके कारनामें लिखते लिखते मेरा जीवन निकल जायेंगा लेकिन इन ..........दलालों के कारनामों की फेहरिस्त समाप्त नहीं होगी। ये लोग चैनलों में अपनी बेटियों की उम्र की लड़कियों से यार कहकर बात करते हैं और मौका मिलते ही इनका आंखों ही आंखों में बलात्कार करने से भी नहीं चूकते। चैनलों में काम करने वाली ज्यादातर महिलाएं इनसे परेशान रहती हैं लेकिन नौकरी करनी है तो इन.........को सहन भी करना पड़ता है, इसी सोच के साथ यहां काम करने की मजबूरी रहती है और ऐसे दलालों की चांदी। पिछले दिनों ऐसे ही एक पत्रकार के मुंह पर कालिख भी पूती और इनके मुंह पर लोगों ने न सिर्फ थूका बल्कि खगार वाला थूक मुंह भर भरके थूका। ये प्रकाश सिंह नाम के जंतु है तो उमा खुराना फर्जी स्टिंग के मसीहा है। इन्होंने उमा खुराना नाम की महिला को फंसाने के लिए न सिर्फ अपनी जूनियर का जमकर इस्तेमाल किया बल्कि दोनों महिलाओं को ब्लैक मेल भी किया। प्रकाश ने न सिर्फ पत्रकारिता के दामन को तार तार किया बल्कि पत्रकारिता के सबसे पुख्ता हथियार को भी बदनाम कर दिया। हैरानी की बात ये रही की प्रकाश के बारे में सभी कुछ जानते बूझते चैनलों के मालिकों ने प्रकाश को नौकरी दी और अहम जिम्मेदारी भी सौंपी। अब ये जिम्मेदारी क्या सोच कर दी गयी ये अलग मसला हो सकता है लेकिन प्रकाश बाबू यहां भी अपनी आदतों से बाज नहीं आये और एक चैनल में काम करने वाली महिला को जा छेडा,वो तो महिला ने साहस से काम लिया और प्रकाश की लाइट बुझा दी नहीं तो प्रकाश न जाने कितनी गंदगी फैलाते। इसी तरह से प्रकाश के नक्शे कदम पर एक और भाई है जो प्रकाश की राह पर चल रहे है, उम्र से तो ये चालीस का आंकड़ा पार कर चूके हैं तो देश के कई चैनलों में काम भी कर चूके हैं। अपनी सफेद दाढी की चिंता इन्हें न पहले थी और न अब है। पैसा और लड़की के लिए ये कितना गिर जाते हैं इसकी मिसाल हम आपको कुछ इस तरह से देते हैं कि जिस चैनल में ये काम करते हैं वह चैनल ही लेने और देने के लिए देश में मशहूर है। हालांकि साधारण देश का जनता इसे इलैक्ट्रेनिक मीडिया का पंजाब केसरी कहती है। यहां पर भाई का जलवा है। ये यहां पर अपनी सफेद दाढी और मुंह में रजनीगंधा लिए पुरानी जींस और टीशर्ट में लड़कियों को धूरते नोयडा में मिल जायेंगे। यहां पर लड़कियों को अपने खास अंदाज में यार और लखनवी लहजे का जिक्र करते हुए लड़कियों की कमर पर हाथ रखते देखे जा सकते हैं। ये दिल्ली में होने वाली पेज थ्री पार्टी में मिल सकते हैं और कभी कभार किसी डिस्को थेक मे हवस पूरी करते भी देखे जा सकते हैं। जब इनका यहां भी पेट नहीं भरता तो अपनी ....... में उंगली देकर खुजाते हुए ये आपको बंगाली मार्किट में मछली खरीदते हुए मिल सकते हैं। यहां पर ये मछली की ...........सहलाते हुए बडे खुश दिखाई देंगे। यहाँ के बाद ये घर जाते है और फिश पका कर दो पेग दारू के लगाकर पयजामा खोल कर सो जाते है। क्रमश:
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